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चुनाव में हिंसा फैलाने की साजिश रच रहा है पाक

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पाकिस्तान लोकसभा चुनाव के दौरान घाटी में अस्थिरता फैलाने की कोशिश में जुटा है। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव के दौरान घाटी में हिंसा फैलाने और आतंकी गुटों को शह देने की कोशिश सीमा पार से जारी है। पाकिस्तान चाहता है कि कश्मीर में शांतिपूर्ण मतदान कराने के सुरक्षा एजेंसियों के प्लान में खलल डाला जाए और दहशत की वजह से लोग वोट देने के लिए बाहर न निकले। खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकी गुटों ने पाकिस्तान में मौजूद अपने आकाओं के निर्देश पर पूरा खाका तैयार किया है।घाटी के कई इलाकों को अशांति फैलाने के लिए चुना गया है।

आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा, जैश-ए-मोहम्मद व हिजबुल मुजाहिदीन बड़ी आतंकी वारदात के लिए एक दूसरे से हाथ मिलाकर रणनीति बनाने में जुटे है। ऐसे में फरवरी में हुई पुलवामा की घटना के बाद गंभीरता से विचार किया जाने लगा है कि जब सेना और अर्धसैनिक बलों का काफिला गुजर रहा हो तो उसकी सुरक्षा के क्या इंतजाम होने चाहिए। इसी के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर राजमार्ग पर हफ्ते में दो दिन सामान्य नागरिकों की आवाजाही पर दिन में 12 घंटे पाबंदी लगाने का फैसला किया गया। हालांकि यह नियम पहले से लागू है कि जब सेना या अर्धसैनिक बलों का काफिला गुजर रहा हो तो उस समय सामान्य नागरिक वाहनों को रोक दिया जाता है। मगर केंद्र सरकार के ताजा फैसले पर कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेस ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह केंद्र सरकार का कश्मीरी नागरिकों का दमन का नया हथकंडा है।

नेशनल कॉन्फ्रेस के उमर अब्दुल्ला ने बीते बुधवार को राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना-प्रदर्शन किया। हालांकि बुधवार जगह-जगह तैनात डयूटी मजिस्ट्रेटों ने सामान्य नागरिकों की हथेलियों पर ठप्पे लगाकर उन्हें आने जाने की अनुमति दी। यह सही है कि हफ्ते में दो दिन 12-12 घंटे के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग से आम वाहनों के गुजरने पर रोक लगाने से सामान्य नागरिकों को कई तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ेगा। मगर स्थानीय लोग कम ही होते हैं, जिन्हें हर रोज राष्ट्रीय राजमार्ग से लंबी दूरी का सफर तय करना पड़ता है। छोटी दूरी तक आने जाने के दूसरे रास्ते भी है। उनका इस्तेमाल किया जा सकता है। फिर जिन्हें किसी तरह की आकस्मिक जरूरत है, उसके लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात किए गए है।

वे उनसे अनुमति लेकर आ जा सकते हैं। इस बारे में केंद्र सरकार का कहना है कि फिलहाल यह फैसला अगले महीने के अंत तक लागू रहेगा। उसके बाद यह स्थिति नहीं रहेगी। चुनाव के दौरान घाटी में हिंसा फैलाने की पाक की कोशिश के मद्देनजर यह जरूरी है। अगले महीने मई तक चुनाव भी संपन्न हो जाएंगे।




from Opinion - samacharjagat.com
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