वास्तविक सम्पन्नता व्यक्ति के भीतर विद्यमान रहती है - social Gyan

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वास्तविक सम्पन्नता व्यक्ति के भीतर विद्यमान रहती है

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शंका और डर मनुष्य की प्रगति के घोर विरोधी है क्योंकि भय ग्रस्त और शंकालु व्यक्ति कभी भी समृद्ध नहीं हो सकता है क्योंकि परस्पर विरोधी विचारधारा उसकी प्रगति में बाधक होती ही है। विचारों में सम्पन्नता, विचारों में विपिन्नता, विचारों में भय और विचारों में संदेह ये सब व्यक्ति के जीवन को बहुत प्रभावित करते हैं। यदि व्यक्ति के चारों ओर दरिद्रता है, गरीबी है तो सबसे पहले उसे अपनी भीतर की दरिद्रता को मिटाना होगा, हटाना होगा। श्रीप्रभु हमारा तभी साथ देते हैं जब हम स्वयं अपना साथ देते हैं, वह हमेशा हमारे साथ रहते हैं, जिनका भी उन पर विश्वास होता है उसके यहां किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रहेगी।

एक बहुत गरीब स्त्री जिसको हमेशा एक पिछड़े गांव में ही रहना पड़ता था, लेकिन वह किसी प्रकार से एक सम्पन्न गांव में चली गई। उसे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि वह जिस घर में ठहरी, उसमें बिजली की रोशनी थी। इससे पहले उसने कभी बिजली नहीं देखी थी और न ही बिजली के बारे में कुछ जानती थी। कुछ दिनों के बाद उस गांव में एक व्यक्ति बिजली का बल्ब बेचते हुए आया और उससे कहने लगा कि वह उसके पुराने बल्ब के स्थान पर अपने नए बल्ब को लगाना चाहता है और दिखाना चाहता है कि दोनों में कितना अंतर है जब साठ वाट का बल्ब लगाने से महिला का कमरा पहले से भी अधिक जगमग हो गया। क्योंकि उस महिला को यह ज्ञान नहीं था कि उस असीम प्रकाश का स्त्रोत तो उसके घर में ही विद्यमान था, केवल बल्ब बदलने की बात थी।

व्यक्तियों की भी ऐसी ही स्थिति है, वे सबके सब सुख की तलाश कहीं बाहर, बाजार में, पार्क में, होटल में और अन्य जगहों पर करते रहते हैं, इसी प्रकार भौतिक सुख की तलाश में सब कुछ घर में इक्कट्ठा करने के बावजूद भी वे कभी एक भी पल सुख-शांति से नहीं रह सकते हैं, क्योंकि ऐसे लोग अंदर से दिवालिए अर्थात् विचारों से दिवालिए बने हुए हैं। हमारे भीतर वह सारी शक्ति विद्यमान है, जो हमारे लिए है। हम हमारी अद्भुत शक्ति पर हर हाल में विश्वास करना होगा क्योंकि सब कुछ भीतर के विचारों में छिपा है, इसे ढूंढ़ना आपका काम है, समझना आपका काम है और काम में लेना आपका काम है।

प्रेरणा बिन्दु:-
जिस प्रकार से सोने-चांदी अपने आप जमीन के बाहर नहीं आते हैं उसकी प्राकर आपके समृद्ध विचार भी आपके चाहने पर ही बाहर आएंगे और सबको समृद्ध करेंगे।




from Opinion - samacharjagat.com
आगे पढ़े -समचरजगत

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