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मैं यहां कोई विशेष कार्य पूरा करने के लिए हूं

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व्यक्ति जन्म से लेकर मृत्यु तक यह समझ ही नहीं पाता है कि वह यहां किसलिए आया है, उसके जीवन का उद्देश्य क्या है, उसे कब क्या करना चाहिए और इस अनमोल जीवन को कैसे व्यतीत करना चाहिए। इस प्रकृति में मनुष्य तो क्या कोई भी ऐसी चीज नहीं है जो अर्थहीन हो, छोटी होया फिर बेकार हो। जब हर सजीव निर्जीव चीज का अपना अलग महत्व है तो फिर मनुष्य का महत्व तो कितना हो सकता है, इसका अंदाज तो हर कोई को होना चाहिए। लेकिन सच तो यह है कि इसका अंदाज बड़ों-बड़ों को भी नहीं हो पाता है। इन सबके पीछे एक ही महत्वपूर्ण बात हो सकती है कि व्यक्ति का जीवन दूसरों पर आधारित होता दिखाई दे रहा है, उसका जीवन दूसरों की नकल पर आधारित है, दूसरों के क्रिया-कलापों पर ही नजर गड़ाये दिख रहा है और दूसरों के बारे में सब कुछ जानता प्रतीत हो रहा है।

व्यक्ति दूसरों के बारे में सब कुछ जानता है और जानना चाहता है, वह दूसरों के जीवन में अधिकार सेउतरना चाहता है, उसे विचलित करना चाहता है परेशान करके स्वयं खुश रहना चाहता है, उसकी बराबरी करना चाहता है, नीचा दिखानाचाहता है पराजित करना चाहता है, अंधी हौड़ करना चाहता है और बेतहाशा बिना उद्देश्य की हौड़ करना चाहता है। ऐसे में वह दूसरों को बहुत सुखी मान बैठता है, सम्पन्न मान लेता है खुद से बेहतर मान लेता है और उसका परिणाम यह निकलता है कि वह स्वयं को कमजोर मान लेता है, असक्षम मान बैठता है लेकिन इसके साथ ही स्वयं को बहुत ज्ञानवान, एक्सपर्ट और सब कुछ जानने वाला समझ बैठता है और यही से शुरू हो जाती है अपने जीवन के महकाव की कटारी। वह अच्छे से भूल जाता है कि उसे क्या करना है। वह यहां क्यों है? करना क्या है। और अपने को ऐसा मान बैठता है जैसे कि वह कभी मरेगा ही नहीं, उसे हमेशा यही रहना है और सारी भौतिक सम्पत्ति उसके साथ ही जानी है।

जिसने भी अपने जीवन की सार्थकता को समझा वही अपने मूल कर्म को करने में सफल हुआ, फिर उसके लिए इस दुनिया की प्रत्येक चीज सार वाली होगई, प्रत्येक चीज में उसे सार और प्यार दिखाई देने लगा और साथ में उपकार उसके जीवन का उद्देश्य हो गया और इसी उद्देश्य ने उससे उसका विशेष काम पूराकरवाया। आइए, मानव जीवन के महान उद्देश्य को समझते और अपने जीवन को प्यार और उपकार में लगाकर सार्थक बनायें।

प्रेरणा बिन्दु:-
प्रभु ने प्रत्येक व्यक्ति को विशेष और महान काम को सम्पन्न करने के लिए भेजा है और इस महान काम की शुरुआत और अंत प्यार और उपहार से होता है ।




from Opinion - samacharjagat.com
आगे पढ़े -समचरजगत

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