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बच्चों काे चुस्त और तंदुरुस्त बनाएगी फाइबर, प्रोटीन से युक्त ये डाइट

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अगर आपका बच्चा सुस्त, थका हुआ महसूस कर रहा है और पढ़ाई व खेलकूद में रुचि नहीं ले रहा है तो जानना जरूरी है कि कहीं उसकी डेली डाइट में पोषक तत्वों की कमी तो नहीं है। ऐसे में बच्चे को कुपोषण का खतरा भी हो सकता है। बचपन में पोषक तत्वों की कमी से वयस्क होने पर बच्चे की बौद्धिक क्षमता और कार्यक्षमता पर असर पड़ता है।

बीमारी से मुक्ति
विशेषज्ञाें के अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों से बच्चे का बचपन बीमारी मुक्त रहता है। अच्छा पोषण उच्च वसा युक्त खाने या स्नैक्स में नहीं बल्कि हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध से युक्त उत्पाद, फल और बादाम आदि से सूक्ष्म पोषक तत्वों को पूरा किया जा सकता है।

प्री-स्कूल डाइट
स्कूल जाने से पहले की अवस्था में बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिए उसे कार्बोहाइड्रेट व वसायुक्त खाद्य पदार्थ देने चाहिए। यह समय बच्चे की मसल ग्रोथ का होता है।

प्रोपर प्ले-डाइट
जब बच्चा स्कूल जाने लगता है तो उसकी मेंटल, फिजिकल ग्रोथ होती है और लंबाई भी लगातार बढ़ने लगती है। ऐसे में प्रोटीनयुक्त चीजें (दूध, दही, पनीर) व कार्बोहाइड्रेट (रोटी व अनाज) के साथ मिनरल्स और विटामिन के लिए हरी सब्जियां व फल खिलाने चाहिए।

ऐसे रखें बैलेंस डाइट
11 सेे 12 वर्ष की उम्र तक बच्चे की बैलेंस्ड डाइट में यह सब होना चाहिए :
60 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट (एनर्जी के लिए चावल, रोटी व अन्य अनाज)
30 प्रतिशत प्रोटीन (मसल्स व हड्डियों की मजबूती के लिए दालें व डेयरी उत्पाद)
10 प्रतिशत वसा (शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने के लिए मूंगफली, सोयाबीन)
एक कप फाइबर युक्त फलों का जूस व हरी सब्जियां (स्वस्थ आंखों व हैल्दी त्वचा के लिए)




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