भारत को अफगानिस्तान में अपने हितों को बढ़ाने तालिबान के साथ वार्ता में शामिल होना चाहिए : सेनाप्रमुख - social Gyan

Post Top Ad

Responsive Ads Here

भारत को अफगानिस्तान में अपने हितों को बढ़ाने तालिबान के साथ वार्ता में शामिल होना चाहिए : सेनाप्रमुख

Share This

नयी दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने बृहस्पतिवार को कहा कि जब कई प्रमुख देश तालिबान के साथ वार्ता में शामिल हो रहे हैं तो भारत उससे अलग नहीं रह सकता। जनरल रावत ने कहा कि अफगानिस्तान में भारत के हितों को आगे बढ़ाने के लिए वार्ता जरूरी है।

जनरल रावत ने कहा कि भारत को इस बातचीत से अलग नहीं रहना चाहिए जहंा प्रमुख देश अफगानिस्तान में शांति एवं स्थिरता लाने के तरीके खोजने के लिए तालिबान के साथ बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने यहंा एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ;;तालिबान के साथ कई देश बातचीत कर रहे हैं। जिस मुद्दे का हमें निर्णय करना है..क्या अफगानिस्तान में हमारे हित हैं। यदि जवाब हंा है तो आप इस बातचीत से अलग नहीं रह सकते।

उन्होंने बुधवार को ;रायसीना डायलॉग में अपने संबोधन में अफगानिस्तान के साथ वार्ता का समर्थन किया था। उन्होंने कहा, ;;हमारी सोच यह है...हंा अफगानिस्तान में हमारे हित हैं और यदि हमारे हित हैं तो, और यदि अन्य लोग कह रहे हैं कि वार्ता होनी चाहिए तो हमें उसका हिस्सा बनना चाहिए। यह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर हो सकता है। हम इससे अलग नहीं रह सकते।

जनरल रावत ने कहा कि ऐसी अनुभूति है कि अफगानिस्तान में चीजों में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, ;;कुछ क्षेत्रों में विकास हुआ है। जनता के बीच यह आवाज उठ रही है कि हम शांति चाहते हैं। इसलिए कुछ देशों ने तालिबान के साथ वार्ता शुरू करने का निर्णय किया...।
उन्होंने कहा, ;;जब तक महत्वपूर्ण बातचीत में नहीं बैठेंगे आपको पता नहीं चलेगा कि क्या हो रहा है...मैंने यह नहीं कहा कि नेतृत्व करते हुए बातचीत करिये।

सेना प्रमुख की बुधवार को आयी टिप्पणी तालिबान के साथ बातचीत में शामिल होने के बारे में सरकार के किसी वरिष्ठ प्राधिकारी की ओर से आयी ऐसी पहली सार्वजनिक टिप्पणी है। अमेरिका और रूस जैसी प्रमुख शक्तियां बाधित अफगान शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के अपने प्रयासों के तहत तालिबान तक पहुंच बना रही हैं। भारत अफगानिस्तान में शांति सुलह प्रक्रिया में एक प्रमुख हितधारक रहा है।

एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर भारत ने नवम्बर में मास्को में आयोजित अफगान शांति प्रक्रिया सम्मेलन के लिए दो पूर्व राजनयिकों को ;;गैर सरकारी हैसियत में भेजा था। इस सम्मेलन में उच्च स्तरीय तालिबान प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ था। रूस द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में अफगानिस्तान के प्रतिनिधियों के साथ अमेरिका, पाकिस्तान और चीन सहित कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। एजेंसी




from National - samacharjagat.com
आगे पढ़े -समचरजगत

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here