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दूसरों के सुख से खुश हो, दुखी नहीं

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एक बार दो वृद्ध महिलाऐं बकरियों को जंगल में चराने ले गई। बकरियां स्वतंत्र रूप से जंगल में चरती रही और महिलाऐं आपस में बतियाती रही। शाम होते-होते एक महिला की बकरी गुम हो गई। काफी तलाश करने के बाद भी बकरी नहीं मिली। वह महिला घर पर आकर रोने लगी। लोग उसकी रोने की आवाज सुनकर उसके घर पर इकटठा हो गये। लोगों ने उस महिला से पूछा कि आप रो क्यों रही है ऐसा क्या हो गया जो इतने जोर-जोर से रो रही हो वह महिला रोते हुए बोली अरे। मेरे साथ वाली की बकरी घर पर आ गई है यह गुम क्यों नहीं हुई मैं तो इसलिए रो रही हूॅ मेरी बकरी खो जाने का मुझे बिलकुल भी गम नहीं है इसकी बकरी घर पर क्यों आ गई यहीं मेरे दुख व रोने का मूल कारण है।

एक दूसरी कहानी है जिसे जिससे बहुत सुनाया करते थे। एक वस्तु धनवान बागवान था उसने एक दिन सुबह कुछ मजदूर अपने बाग में काम करने के लिए बुलाये। अंगूर पक गये थे उनको तोड़ने के लिए उन्हें बुलाया गया था बागवान ने देखा कि पूरे अंगूर शाम तक नहीं टूट पायेंगे इसलिए कुछ मजदूर दोपहर में और बुला लिये। बावजूद सब मजदूरों के भी अंगूर शाम तक टूट पाना मुश्किल होता देखा। बागवान ने सूरज ढले कुछ मजदूर और बुला लिये और काम की समद्र्धी पर सबको बराबर-बराबर मजदूरी बांट दी। तथा सूरज उगने से सूरज डूबने तक काम किया था न बीच में भोजन किया और न ही थोड़ा विश्राम किया था लेकिन मजदूरी के रूप में उनको उतना ही मिला था जितना सूरज ढले काम पर आने वालों को मिला था इस बात से वे बागवान से नाराज हो गये।

वे कह रहे थे कि जो दुपहर में जाये है उनको तो हमसे आधा मिलना चाहिए और सूरज ढले आये उनको केवल दस प्रतिशत ही मिलना चाहिए बागवान उनकी बात सुनकर हंसने लगा और उनसे बोला तुममे जितना काम किया उतना पैसा तुम्हे मिला या नहीं। वे बोले हमें हमारे काम से तो अधिक ही मिला है। वे आगे बोले हमें हमारी मजदूरी से नाराजगी और दुख नहीं है हमें तो हमारे बाद में काम पर लगने वालों को हमारे बराबर मजदूरी मिलने पर दुख है और यह छोटा दुख नहीं बहुत बड़ा दुख है।

प्रिय मित्रों, आज की स्थितियां बड़ी विचित्र है व्यक्ति को अपने घर के एक ओर ऊंचा और बड़ा घर दिख रहा है वह उससे परेशान है और उस पर अनेक प्रकार की छींटाकशी करता है उसके घर के दूसरी तरफ एक झौंपड़ी बनी हुई है उसे देखकर वह बहुत खुश होता है इस सोच को बदलना ही वास्तविक जीवन है।

प्रेरणा बिन्दु:-
दूसरों के स्वास्थ्य की सुख की और आनन्द की प्रशंसा करना सीखे तभी आप वास्तविक आनन्द महसूस ही नहीं आनन्द में रहेंगे भी।




from Opinion - samacharjagat.com
आगे पढ़े -समचरजगत

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