सफल मिशन वही जिसमें प्रेम-दक्षता-सर्वकल्याण हो - social Gyan

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सफल मिशन वही जिसमें प्रेम-दक्षता-सर्वकल्याण हो

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हर आदमी सफलता प्राप्त करना चाहता है और दुनिया का सबसे सफल व्यक्ति बनना चाहता है और ऐसा सम्भव है प्रेम-दक्षता और सर्वकल्याण के उद्देश्य को अपने मिशन में शामिल करने से। सफल होने के लिए जो पहली बात है अपने रूचि के काम से बेहद प्रेम करना क्योंकि बिना प्रेम का काम सफल होना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव भी है। रूचि का काम ही सफलता की ओर जाता है इसलिए प्रथम चयन अपनी सफलता के लिए अपनी रूचि को प्राथमिकता दें और फिर उसके साथ प्रेम से जुट जायें, बहुत जल्द इसके सुखद परिणाम आने लगेंगे।

लेकिन सुखद परिणामों में उत्तरोत्तर वृद्धि के लिए अपने रूचि के काम में, मिशन में या किसी भी प्रोजेक्ट में दक्षता बहुत जरूरी है। किसी भी काम में एक्सपर्ट हुए बिना मिशन में कामयाबी मिलना संदिग्ध हो जाती है।

मान लें कोई एक युवा, एक डॉक्टर बन जाता है, उसकी बीमार, हताश और विवश लोगों की सेवा करने में बेहद रूचि है। वह केवल नाम का डॉक्टर नहीं बनना चाहता है, वह किसी के कहने से डॉक्टर नहीं बनना चाहता, वह देखा-देखी भी डॉक्टर नहीं बनना चाहता है और केवल धन कमाने के लिए भी डॉक्टर नहीं बनना चाहता है। वह तो वास्तव में ही डॉक्टर बनना चाहता है। इसका सीधा सा मतलब यही हुआ कि वह डॉक्टर के पेशे से ही प्रेम नहीं करता है, वह तो हताश, विवश और बीमार लोगों से भी प्रेम करता है और रूचि के साथ जब प्रेम मिल जाता है तो सफलता बढ़ने लगती है।

सफलता के लिए दूसरी बात है अपने काम में रूचि के साथ-साथ दक्षता हासिल करना भी बेहद जरूरी है। जब तक कोई अपने काम में या प्रोजेक्ट में दक्ष नहीं बनेगा। जब तक वह सफल हो ही नहीं सकता है क्योंकि दक्षता उसे शिखर तक ले जाती है, उच्चतम स्तर तक ले जाती है। तीसरी जो बात है सफल होने के लिए वह अपने जॉब में, काम में, प्रोजेक्ट में एक केवल निजी स्वार्थ न हो, कुछ लोगों का ही भला न हो बल्कि उससे अधिकांश लोगों का कल्याण हो रहा हो, सर्वहित हो रहा हो, सबको फायदा मिल रहा हो और किसी न किसी माध्यम से सम्पूर्ण समाज का कल्याण उसमें दिया हो। इस प्रकार एक सफल व्यक्ति के लिए अपने मिशन को रूचि के साथ, प्रेम के साथ, दक्षता के साथ और सर्वकल्याण के साथ आगे बढ़ायेगा तो, उसका वह मिशन न केवल आगे बढ़ेगा बल्कि सबसे आगे बढ़ेगा।

प्रेरणा बिन्दु:-
कोई भी व्यक्ति बड़ा भवन या बड़ा संस्थान बनाने से बड़ा या सफल नहीं होता है, बड़ा या सफल नहीं हो जाता है, बड़ा तो अपनी रूचि, दक्षता और सर्वकल्याण की भावना को क्रियान्वित करने से होता है।




from Opinion - samacharjagat.com
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